इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘शाकटायन व्याकरण’ पर आधारित एक ग्रंथ है, जो संस्कृत व्याकरण की एक प्राचीन और महत्वपूर्ण परंपरा है। आचार्य शाकटायन को पाणिని से भी पहले का एक प्रमुख वैयाकरण माना जाता है। यह व्याकरण जैन परंपरा में विशेष रूप से प्रभावशाली रहा है। यह पुस्तक शाकटायन द्वारा रचित व्याकरण के सूत्रों, उनकी संरचना और उनके नियमों की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत करती है। यह संस्कृत व्याकरण और भाषा विज्ञान के गंभीर छात्रों तथा शोधकर्ताओं के लिए एक मूल्यवान कृति है।
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