इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह आचार्य पूज्यपाद द्वारा रचित एक प्रसिद्ध जैन स्तोत्र है, जो सोलहवें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ को समर्पित है। ‘शांतिभक्ति’ का अर्थ है ‘शांति के लिए भक्ति’। इस स्तोत्र में भक्त सांसारिक कष्टों और आंतरिक अशांति से मुक्ति पाने तथा विश्व में शांति की स्थापना के लिए भगवान शांतिनाथ से प्रार्थना करता है। अपनी सुंदर भाषा और गहन आध्यात्मिक भाव के कारण, यह स्तोत्र जैन समुदाय में अत्यंत लोकप्रिय है और इसे शांति और आत्म-शुद्धि के लिए नियमित रूप से पढ़ा जाता है।
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