इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“शीराज़ा” भारत की विभिन्न साहित्यिक अकादमियों द्वारा प्रकाशित की जाने वाली एक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका का नाम है। यह उसका अगस्त-नवंबर 1982 का अंक है, जो उस समय के साहित्यिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। इस अंक में समकालीन लेखकों की कविताएँ, कहानियाँ, ग़ज़लें, आलोचनात्मक लेख और पुस्तक-समीक्षाएँ शामिल होंगी। 1980 के दशक की शुरुआत में साहित्य में सक्रिय विभिन्न आंदोलनों और विचारधाराओं की झलक इसमें देखने को मिल सकती है। यह उस दौर के साहित्यिक सरोकारों, भाषा के बदलते स्वरूप और नए प्रयोगों को समझने के लिए शोधकर्ताओं और साहित्य प्रेमियों के लिए एक मूल्यवान स्रोत है।
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