इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
शीराज़ा’ जम्मू और कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी द्वारा प्रकाशित एक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका है। यह विशेष अंक अगस्त-सितंबर 1980 का है। यह पत्रिका डोगरी, कश्मीरी, उर्दू और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में साहित्य को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इस अंक में उस समय के प्रमुख और उभरते हुए लेखकों की कविताएँ, कहानियाँ, ग़ज़लें और आलोचनात्मक लेख शामिल होंगे। यह पत्रिका न केवल क्षेत्र की साहित्यिक गतिविधियों को दर्शाती है, बल्कि उस दौर के सामाजिक और सांस्कृतिक माहौल का भी एक प्रतिबिंब प्रस्तुत करती है। यह जम्मू और कश्मीर के साहित्यिक इतिहास और भाषा के विकास को समझने के लिए एक मूल्यवान दस्तावेज़ है।
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