इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक अकादमिक और साहित्यिक आलोचना पर आधारित शोध-प्रबंध है। इसमें महाकवि माघ द्वारा रचित प्रसिद्ध संस्कृत महाकाव्य ‘शिशुपालवध’ का भारतीय काव्यशास्त्र के ‘ध्वनि-सिद्धांत’ के दृष्टिकोण से अध्ययन किया गया है। ‘ध्वनि’ का अर्थ है काव्य में छिपा हुआ व्यंग्यार्थ या सुझाया गया अर्थ। यह शोध-प्रबंध यह विश्लेषण करता है कि माघ ने अपने महाकाव्य में ध्वनि-तत्व का कितनी कुशलता से प्रयोग किया है।
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