इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“शिवशतकम्” का अर्थ है “भगवान शिव पर सौ श्लोकों का संग्रह”। यह भगवान शिव को समर्पित एक भक्तिपूर्ण मुक्तक काव्य है। इस शतक-काव्य में कवि ने सौ श्लोकों के माध्यम से शिव के विभिन्न स्वरूपों, उनके गुणों (जैसे- वैराग्य, करुणा), उनकी लीलाओं (जैसे- गंगा-धारण, विष-पान), और उनके तांडव नृत्य का काव्यात्मक गुणगान किया है। प्रत्येक श्लोक अपने आप में पूर्ण होता है और शिव के किसी न किसी पहलू पर प्रकाश डालता है। यह काव्य शिव-भक्तों के लिए स्तुति-पाठ का एक उत्तम माध्यम है, जो उन्हें भक्ति-रस में डुबोता है और उनके आराध्य के प्रति उनके प्रेम को और गहरा करता है।
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