इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“शिवस्वरोदय” स्वर योग पर एक प्राचीन और महत्वपूर्ण तांत्रिक ग्रंथ है। यह ग्रंथ भगवान शिव और पार्वती के बीच एक संवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें शिव स्वर विज्ञान के रहस्य को प्रकट करते हैं। ‘स्वर योग’ श्वास के विज्ञान पर आधारित है, जो बताता है कि नासिका के छिद्रों (इड़ा-पिंगला) से चलने वाली श्वास (स्वर) का हमारे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह पुस्तक सिखाती है कि अपने स्वर को समझकर और नियंत्रित करके व्यक्ति अपने कार्यों में सफलता प्राप्त कर सकता है और स्वास्थ्य तथा आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है। हिंदी टीका इसे आम पाठकों के लिए सुलभ बनाती है।
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