इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
अभिधान राजेन्द्र’ जैन धर्म का एक विशाल और विश्वकोशीय महाग्रंथ है, जिसकी रचना आचार्य राजेन्द्रसूरि जी ने की थी। यह प्राकृत, संस्कृत और मागधी भाषाओं के लाखों शब्दों का एक संग्रह है, जिनके अर्थ और शास्त्रीय व्याख्याएं दी गई हैं। यह पाँचवाँ भाग उसी महान ज्ञान-कोष की एक कड़ी है। यह केवल एक शब्दकोश नहीं, बल्कि जैन दर्शन, साहित्य और संस्कृति का एक अथाह सागर है, जो विद्वानों के लिए एक अनिवार्य संदर्भ ग्रंथ है।
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