इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“श्री ललिताम्बा शतकम्” का अर्थ है “देवी ललिताम्बिका पर सौ श्लोकों का संग्रह”। यह शाक्त परंपरा, विशेषकर श्रीविद्या के उपासकों, का एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र-काव्य है। इस शतक-काव्य में कवि ने देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी के मनमोहक स्वरूप, उनके श्रृंगार, उनकी करुणा, और उनकी ब्रह्मांडीय शक्ति का सौ श्लोकों में काव्यात्मक और अलंकृत वर्णन किया है। इसका पाठ करने से भक्तों को देवी की कृपा, सौंदर्य और आनंद की अनुभूति होती है। यह केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि एक सुंदर साहित्यिक कृति भी है, जो देवी के प्रति गहरी भक्ति और काव्य-कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।
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