इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक जैन ‘पुराण’ है जो जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, भगवान ‘ऋषभदेव’ (आदिनाथ) के जीवन और उनके पूर्व भवों का विस्तृत वर्णन करता है। इसमें उनके द्वारा मानवता को कृषि, कला और शासन (असि, मसि, कृषि) सिखाने, उनके वैराग्य, तपस्या, और मोक्ष प्राप्त करने की कथा का भक्तिमय चित्रण है। यह ग्रंथ न केवल एक धार्मिक आख्यान है, बल्कि यह मानव सभ्यता की शुरुआत की जैन अवधारणा को भी प्रस्तुत करता है।
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