इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
श्रीसिद्धान्तशिखामणि’ वीरशैव (लिंगायत) संप्रदाय का एक प्रमुख और पवित्र ग्रंथ है, जिसे एक ‘दार्शनिक काव्य’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह कृति वीरशैव दर्शन के सिद्धांतों, जिन्हें ‘शक्तिविशिष्टाद्वैत’ कहा जाता है, की काव्यात्मक शैली में व्याख्या करती है। इसमें गुरु, लिंग, जंगम, पादोदक, और प्रसाद जैसी अवधारणाओं के महत्व को समझाया गया है। यह ग्रंथ केवल सूखा दर्शन नहीं है, बल्कि इसमें भक्ति और काव्यात्मक सौंदर्य का भी अद्भुत समन्वय है। यह वीरशैव समुदाय के लिए एक मार्गदर्शक ग्रंथ है और यह भारतीय दर्शन की एक महत्वपूर्ण शाखा को समझने के लिए भी एक मूल्यवान स्रोत है।
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