इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह महान कथाशिल्पी शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के विश्वप्रसिद्ध उपन्यास ‘श्रीकान्त’ का दूसरा भाग है। यह उपन्यास नायक श्रीकान्त के जीवन के घुमक्कड़ अनुभवों की गाथा को आगे बढ़ाता है। इस भाग में उसकी यात्राएँ, विभिन्न प्रकार के लोगों से उसका मिलना, और विशेष रूप से राजलक्ष्मी के साथ उसके जटिल और गहन प्रेम-संबंध का मार्मिक चित्रण है। यह केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि मानव-मन के गहरे मनोविज्ञान और तत्कालीन बंगाली समाज का एक यथार्थवादी दस्तावेज भी है।
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