इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“भगवद्गीता भाषा” श्रीमद्भगवद्गीता का एक ‘भाषा’ यानी किसी लोकभाषा (जैसे हिंदी) में किया गया अनुवाद या भाष्य है। इस प्रकार की कृतियों का मुख्य उद्देश्य गीता के मूल संस्कृत श्लोकों में निहित गूढ़ दार्शनिक ज्ञान को आम लोगों के लिए सुलभ बनाना होता है। इसमें प्रत्येक श्लोक का सरल और स्पष्ट अनुवाद दिया जाता है, और साथ ही उसकी संक्षिप्त व्याख्या भी की जाती है ताकि पाठक कर्म, ज्ञान, भक्ति और धर्म के सिद्धांतों को आसानी से समझ सकें। यह पुस्तक उन सभी लोगों के लिए उपयोगी है जो संस्कृत नहीं जानते लेकिन गीता के जीवन-परिवर्तनकारी संदेश को पढ़ना और अपने जीवन में उतारना चाहते हैं।
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