इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ पर आधारित किसी विस्तृत टीका या व्याख्या श्रृंखला का छठा भाग है। मूल गीता में 18 अध्याय हैं, और यह संभव है कि यह श्रृंखला कुछ अध्यायों को एक भाग में लेकर उनकी गहन और विस्तृत मीमांसा प्रस्तुत करती हो। इस छठे भाग में गीता के मध्य के कुछ अध्यायों के श्लोकों का शब्दार्थ, भावार्थ और दार्शनिक व्याख्या हो सकती है। यह उन गंभीर साधकों और विद्वानों के लिए है जो गीता के प्रत्येक शब्द और उसके गहरे अर्थों में डूबना चाहते हैं।
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