इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक गहन और शास्त्रीय जैन ग्रंथ है, जिसका शीर्षक ‘मंत्रों के राजा के गुणों का कल्पवृक्ष रूपी महासागर’ का भाव देता है। यह कृति संभवतः किसी प्रमुख जैन मंत्र (जैसे णमोकार मंत्र) की महिमा, उसके गुणों, और उसके जाप की विधि (‘कल्प’) पर एक विस्तृत विवेचन है। जिनकीर्ति सूरि द्वारा रचित यह ग्रंथ मंत्र-शास्त्र और जैन साधना-पद्धति में रुचि रखने वाले विद्वानों और साधकों के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है।
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