इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘जैन महाभारत’ का पहला खंड है, जिसे ‘शुक्ल’ विशेषण से पहचाना गया है। जैन परंपरा में महाभारत की कथा को जैन सिद्धांतों और पात्रों के साथ प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ को कृष्ण का चचेरा भाई माना जाता है। यह कृति पांडवों और कौरवों की कहानी को एक जैन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है, जिसमें अहिंसा और कर्म के सिद्धांत पर विशेष जोर दिया गया है।
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