इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह एक साधना-ग्रंथ है जो ‘महागणपति’ की ‘सपर्या’ अर्थात् विस्तृत और शास्त्रोक्त पूजा की ‘पद्धति’ का वर्णन करता है। महागणपति, भगवान गणेश के 32 स्वरूपों में से एक, तंत्र-शास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यह पुस्तक श्रीविद्या परंपरा के अंतर्गत महागणपति की उपासना की क्रमबद्ध विधि प्रस्तुत करती है। इसमें गणपति के ध्यान-श्लोक, उनके मूल-मंत्र, यंत्र-निर्माण और पूजन, न्यास, और पूजा में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न उपचारों का विस्तृत निर्देश दिया गया होगा। यह एक गूढ़ और तकनीकी ग्रंथ है, जो केवल उन दीक्षित साधकों के लिए अभिप्रेत है जो महागणपति की तांत्रिक उपासना करते हैं।
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