इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
पंडित आशाधार जी द्वारा रचित यह कृति जैन धर्म की एक महत्वपूर्ण स्तोत्र रचना है। इसमें भगवान जिन (तीर्थंकर) के एक हजार नामों का संकलन है और साथ ही रचयिता ने स्वयं ही इन नामों की ‘विवृत्ति’ अर्थात व्याख्या भी प्रस्तुत की है। प्रत्येक नाम भगवान के किसी विशेष गुण, शक्ति या स्वरूप को प्रकट करता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति, पुण्य और आत्मिक शुद्धि का अनुभव होता है। यह ग्रंथ जैन अनुयायियों के लिए भक्ति और स्वाध्याय का एक उत्कृष्ट साधन है।
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