इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय शाखा से संबंधित यह एक प्रमुख और प्राचीन उपनिषद् है। ‘तैत्तिरीयोपनिषद्’ तीन खंडों में विभाजित है – शिक्षावल्ली, ब्रह्मानन्दवल्ली, और भृगुवल्ली। शिक्षावल्ली में गुरु-शिष्य संबंध और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया गया है। ब्रह्मानन्दवल्ली में ब्रह्म के आनंदमय स्वरूप और पंचकोश (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय, आनंदमय) की प्रसिद्ध अवधारणा का वर्णन है। भृगुवल्ली में तप के माध्यम से ब्रह्म ज्ञान की खोज की कथा है। यह आत्म-ज्ञान और ब्रह्म-ज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
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