इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह जैन धर्म में ‘तप’ की ‘विधियों’ पर एक विस्तृत ग्रंथ का दूसरा भाग है। जैन धर्म में कर्मों का नाश करने और आत्म-शुद्धि के लिए तप का बहुत महत्व है। इस पुस्तक में विभिन्न प्रकार के बाह्य तप (जैसे उपवास) और अभ्यंतर तप (जैसे ध्यान, स्वाध्याय) करने की सही विधि, उनके नियमों और उनके आध्यात्मिक लाभों का वर्णन किया गया है। यह जैन साधकों और तपस्वियों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका है।
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