इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“तेवरी पक्ष” हिंदी साहित्य में ‘तेवरी’ नामक एक विशेष काव्य-विधा को समर्पित पत्रिका या प्रकाशन का नाम हो सकता है। ‘तेवरी’ एक आक्रामक और व्यंग्यात्मक शैली की कविता होती है, जो सामाजिक-राजनीतिक विसंगतियों, भ्रष्टाचार और अन्याय पर सीधा और जोरदार प्रहार करती है। यह उसका जनवरी-मार्च 2008 का अंक है। इस अंक में उस दौर की समकालीन राजनीतिक और सामाजिक घटनाओं पर कवियों की तीखी प्रतिक्रियाओं को कविताओं के रूप में प्रस्तुत किया गया होगा। यह पत्रिका हिंदी कविता की एक विद्रोही और जनवादी धारा का प्रतिनिधित्व करती है, जो व्यवस्था के खिलाफ आम आदमी के गुस्से और असंतोष को वाणी देती है।
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