इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
तेवरी पक्ष’ हिंदी साहित्य की ‘तेवरी’ नामक एक विशिष्ट काव्य विधा को समर्पित एक पत्रिका या संकलन है। जून-सितंबर 2011 का यह अंक इस विधा की रचनाओं को प्रस्तुत करता है। ‘तेवरी’ एक आक्रामक और व्यंग्यात्मक काव्य शैली है जो सामाजिक-राजनीतिक भ्रष्टाचार, अन्याय और विसंगतियों पर सीधे प्रहार करती है। इसमें तीन पंक्तियों का एक विशेष छंद प्रारूप होता है। यह अंक उस समय के समकालीन मुद्दों पर कवियों की तीखी प्रतिक्रियाओं को दर्शाता है और हिंदी कविता में प्रतिरोध के स्वर का एक उदाहरण है।
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