Atharvaveda (अथर्ववेद)
अथर्ववेद’ चारों वेदों में चौथा वेद है। यह अन्य तीन वेदों से थोड़ा अलग है क्योंकि इसमें केवल देवताओं की स्तुति ही नहीं, बल्कि आम मनुष्य के दैनिक जीवन से जुड़ी बातें भी हैं। इसमें रोगों के उपचार के लिए मंत्र (आयुर्वेद का आधार), जादू-टोना, और गृहस्थ जीवन के कर्तव्यों का वर्णन है। इस श्रेणी की किताबें आपको अथर्ववेद के इस अनूठे और व्यावहारिक ज्ञान से परिचित कराएंगी और प्राचीन भारतीय समाज की एक झलक दिखाएंगी।
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