इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
अथर्ववेदसंहिता’ चार वेदों में से अंतिम, अथर्ववेद का मूल मंत्र संग्रह है। ‘संहिता’ का अर्थ है संकलन। इस वेद में लगभग 6,000 मंत्र हैं, जिन्हें 20 कांडों (पुस्तकों) में विभाजित किया गया है। ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के विपरीत, अथर्ववेद मुख्य रूप से आम आदमी के दैनिक जीवन से जुड़ी समस्याओं, इच्छाओं और भयों पर केंद्रित है। इसमें रोगों के उपचार के लिए मंत्र (भैषज्य), लंबी आयु के लिए प्रार्थनाएं (आयुष्य), समृद्धि के लिए अनुष्ठान (पौष्टिक), और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए मंत्र (अभिचार) शामिल हैं। इसके अलावा, इसमें ब्रह्म और आत्मा पर गहरे दार्शनिक विचार भी मिलते हैं। यह प्राचीन भारतीय समाज और लोक-संस्कृति को समझने का एक अनूठा स्रोत है।
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