इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह चार वेदों में से एक, ‘अथर्ववेद संहिता’ का बारहवाँ खंड है। अथर्ववेद में जहाँ एक ओर ब्रह्मज्ञान और दार्शनिक चिंतन है, वहीं दूसरी ओर इसमें लौकिक जीवन से संबंधित मंत्र भी हैं, जैसे कि रोगों के उपचार, लंबी आयु की प्रार्थना, और दैनिक जीवन की समस्याओं के समाधान। यह खंड अथर्ववेद के मूल मंत्रों को संस्कृत में प्रस्तुत करता है, साथ ही उनका हिंदी अनुवाद और व्याख्या भी प्रदान करता है, जिससे पाठक इस महत्वपूर्ण वैदिक ग्रंथ को समझ सकें।
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