इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक विद्वत्तापूर्ण और आलोचनात्मक ग्रंथ है जो गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य, विशेषकर ‘रामचरितमानस’, की वैचारिक पृष्ठभूमि (पीठिका) का विश्लेषण करता है। इसमें लेखक ने उन दार्शनिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्रोतों की खोज की है जिन्होंने तुलसी के विचारों को आकार दिया। यह कृति तुलसी के समन्वयवादी दृष्टिकोण, उनके भक्ति-दर्शन और लोक-मंगल की भावना के मूल को समझने का प्रयास करती है। यह हिंदी साहित्य के शोधकर्ताओं और गंभीर अध्येताओं के लिए एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।