इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
त्याग भूमि’ मुंशी प्रेमचंद के बाद के दौर का एक महत्वपूर्ण सामाजिक उपन्यास है, जिसके लेखक जैनेन्द्र कुमार हैं। यह उपन्यास स्त्री-अस्मिता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रश्नों को बहुत ही मार्मिक ढंग से उठाता है। कहानी की मुख्य पात्र मृणाल है, जिसका विवाह एक ऐसे व्यक्ति से होता है जो उसके आदर्शों और व्यक्तित्व का सम्मान नहीं करता। सामाजिक दबावों और पारिवारिक अपेक्षाओं के बावजूद, मृणाल अपने आत्म-सम्मान के लिए संघर्ष करती है और अंततः अपने घर का ‘त्याग’ कर देती है। यह उपन्यास स्त्री के पारंपरिक भूमिकाओं को चुनौती देता है और यह सवाल पूछता है कि क्या एक स्त्री को समाज के लिए अपनी व्यक्तिगत पहचान का बलिदान कर देना चाहिए।
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