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उत्तरराज्झयणाणि [भाग 1] - Uttarajjhayanani [Bhag 1] - Book
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उत्तरराज्झयणाणि [भाग 1] – Uttarajjhayanani [Bhag 1] – Book

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पुस्तक विवरण

आचार्य तुलसी के भाष्य सहित, यह ‘उत्तराध्ययन सूत्र’ का पहला भाग है, जो जैन आगम साहित्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसे भगवान महावीर का अंतिम उपदेश माना जाता है। यह सूत्र जैन साधुओं के आचार-विचार, तपस्या, स्वाध्याय और संयम-जीवन के नियमों का विस्तृत वर्णन करता है। इसमें विभिन्न संवादों, उपमाओं और कथाओं के माध्यम से धर्म के सिद्धांतों को समझाया गया है। आचार्य तुलसी का भाष्य इस प्राचीन ग्रंथ को समकालीन संदर्भ में समझने में मदद करता है, जो इसे साधकों और विद्वानों दोनों के लिए उपयोगी बनाता है।

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