इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक ‘वैदिक व्याकरण’ पर एक गहन और विद्वत्तापूर्ण ग्रंथ का पहला भाग है। लौकिक संस्कृत के व्याकरण (जैसा कि पाणिनि ने वर्णित किया है) से वैदिक संस्कृत का व्याकरण कई मायनों में भिन्न है। इस ग्रंथ में वेदों में प्रयुक्त विशिष्ट व्याकरणिक नियमों, शब्दों के रूपों, और उच्चारण की विशेषताओं का व्यवस्थित और विस्तृत विश्लेषण किया गया है। यह संस्कृत और वैदिक साहित्य के उन्नत छात्रों तथा शोधकर्ताओं के लिए एक अनिवार्य संदर्भ ग्रंथ है।
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