इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
वाक्यपदीयम्’ पाँचवीं शताब्दी के महान भाषा-दार्शनिक भर्तृहरि द्वारा रचित एक मौलिक ग्रंथ है। यह संस्कृत व्याकरण और भाषा-दर्शन का एक आधार स्तंभ है। यह ग्रंथ तीन कांडों (भागों) में विभाजित है। यह प्रथम कांड, जिसे ‘ब्रह्म कांड’ या ‘आगम कांड’ भी कहा जाता है, ‘स्फोट’ के सिद्धांत को स्थापित करता है। भर्तृहरि के अनुसार, स्फोट भाषा की अविभाज्य इकाई है जो अर्थ को प्रकट करती है, और यह परम वास्तविकता ‘शब्द-ब्रह्म’ का ही एक रूप है। यह भाषा के अंतिम दार्शनिक आधार की पड़ताल करता है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।