इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“वशिष्ठ” शीर्षक किसी ज्योतिष, धर्म या अध्यात्म पर केंद्रित पत्रिका का नाम हो सकता है। यह उसका जून 1969 का अंक है। महर्षि वशिष्ठ का नाम ज्ञान और ज्योतिष की परंपरा से गहराई से जुड़ा है। इस अंक में संभवतः ज्योतिषीय गणनाओं, ग्रहों के गोचर और उनके प्रभावों पर आधारित मासिक भविष्यफल, और विभिन्न राशियों के लिए मार्गदर्शन दिया गया होगा। इसके अलावा, इसमें व्रत-त्योहारों, धर्म-कर्म, और भारतीय दर्शन पर लेख भी हो सकते हैं। यह उस दौर के ज्योतिष और धर्म में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण पत्रिका रही होगी, जो उन्हें समकालीन घटनाओं पर एक ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टिकोण प्रदान करती थी।
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