इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
वेदान्तसंज्ञावली’ वेदांत दर्शन में प्रयुक्त होने वाली प्रमुख संज्ञाओं या पारिभाषिक शब्दों की एक सूची या कोश है। ‘संज्ञावली’ का अर्थ है ‘संज्ञाओं की पंक्ति’। इस कृति में ब्रह्म, माया, अविद्या, जीव, ईश्वर, विवर्तवाद, और महावाक्य जैसे सैकड़ों तकनीकी शब्दों को परिभाषित किया गया होगा। ‘सटीका’ होने का अर्थ है कि इसमें केवल परिभाषाएं ही नहीं, बल्कि उन पर एक विस्तृत टीका या व्याख्या भी शामिल है, जो प्रत्येक अवधारणा के अर्थ और संदर्भ को स्पष्ट करती है। यह वेदांत के अध्ययन को सुगम बनाने के लिए एक अत्यंत उपयोगी उपकरण है।
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