इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह एक विद्वत्तापूर्ण और साहित्यिक-आलोचना परक ग्रंथ है जो चारों वेदों (ऋक्, यजुष्, साम, अथर्व) की काव्य और वर्णन-शैलियों का विश्लेषण करता है। इसमें लेखक ने यह पड़ताल की होगी कि वैदिक ऋषियों ने प्रकृति, देवताओं, और यज्ञीय अनुष्ठानों का वर्णन करने के लिए किस प्रकार की भाषा, अलंकार (जैसे- उपमा, रूपक), और काव्य-युक्तियों का प्रयोग किया है। पुस्तक में विभिन्न वेदों की वर्णन-शैली के बीच के अंतर को भी उजागर किया गया होगा, जैसे- ऋग्वेद की काव्यात्मकता, यजुर्वेद की गद्यात्मकता, और सामवेद की संगीतात्मकता। यह वैदिक साहित्य को केवल एक धार्मिक ग्रंथ के रूप में नहीं, बल्कि विश्व के प्राचीनतम काव्य के रूप में समझने का एक प्रयास है।
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