इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह 17वीं सदी के कवि भट्टनारायण द्वारा रचित एक प्रसिद्ध और ओजपूर्ण संस्कृत नाटक है। ‘वेणीसंहारम्’ का अर्थ है ‘चोटी का संवारना’। इसकी कथा महाभारत पर आधारित है और इसका केंद्र द्रौपदी का वह प्रण है कि वह अपनी चोटी तब तक नहीं बांधेगी जब तक दुःशासन के खून से उसके हाथ न रंग जाएँ। यह नाटक वीर रस से भरपूर है और इसमें भीम के भयानक प्रतिशोध और कुरु वंश के विनाश का शक्तिशाली चित्रण है।
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