इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह संस्कृत व्याकरण के दो जटिल विषयों पर एक उच्च स्तरीय और विद्वत्तापूर्ण ग्रंथ है। इसका पहला भाग ‘विभक्त्यर्थ-विमर्श’ है, जिसमें विभिन्न विभक्तियों (जैसे- प्रथमा, द्वितीया) के अर्थों पर गहन तार्किक विचार-विमर्श किया गया है। दूसरा भाग ‘समास-विमर्श’ है, जिसमें विभिन्न प्रकार के समासों की संरचना, उनके अर्थ-निर्णय और उनसे संबंधित व्याकरणिक नियमों का सूक्ष्म विश्लेषण है। ‘उद्धार’ शब्द यह संकेत देता है कि लेखक ने इन विषयों पर पूर्व के मतों का खंडन-मंडन कर एक परिष्कृत और स्पष्ट सिद्धांत स्थापित करने का प्रयास किया है। यह व्याकरण-शास्त्र के विशेषज्ञ विद्वानों के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है।
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