इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक हिंदू धर्म के चौथे वेद, “अथर्ववेद”, के स्वाध्याय (self-study) के लिए एक मार्गदर्शिका का प्रथम भाग है। अथर्ववेद की विषय-वस्तु अन्य तीन वेदों से कुछ भिन्न है; इसमें यज्ञीय मंत्रों के साथ-साथ लौकिक जीवन से संबंधित मंत्र भी बड़ी संख्या में हैं। इस पुस्तक में अथर्ववेद के चुने हुए सूक्तों का मूल पाठ, उनका सरल हिंदी अनुवाद और उनकी व्याख्या दी गई होगी। व्याख्या में मंत्रों के आध्यात्मिक अर्थ के साथ-साथ उनके व्यावहारिक उपयोगों, जैसे- रोग-निवारण, शत्रु-नाश, और पारिवारिक सुख-शांति, पर भी प्रकाश डाला गया होगा। यह आम पाठकों के लिए अथर्ववेद की दुनिया में प्रवेश करने का एक सुलभ साधन है।
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