इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह नागरी प्रचारिणी सभा, काशी, द्वारा प्रकाशित उसकी प्रतिष्ठित शोध-पत्रिका “नागरी प्रचारिणी पत्रिका” का एक महत्वपूर्ण अंक है। यह पत्रिका के प्रकाशन के 71वें वर्ष (संवत् 2023, अर्थात् लगभग 1966 ईस्वी) का दूसरा अंक है। नागरी प्रचारिणी सभा हिंदी भाषा और साहित्य के उत्थान के लिए समर्पित सबसे पुरानी संस्थाओं में से एक है। इस अंक में हिंदी साहित्य के इतिहास, भाषा-विज्ञान, पाठालोचन, और प्राचीन पांडुलिपियों पर आधारित उच्च कोटि के शोध-पत्र और लेख शामिल होंगे। यह हिंदी में अकादमिक शोध की परंपरा का एक मील का पत्थर है और उस दौर के विद्वानों के चिंतन को समझने के लिए एक अमूल्य स्रोत है।
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