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साहित्य मीमांसा - Sahitya Mimamsa - Book
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साहित्य मीमांसा – Sahitya Mimamsa – Book

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327 Pages
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141 MB
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पुस्तक सार

“साहित्य मीमांसा” का अर्थ है “साहित्य का गहन और आलोचनात्मक विश्लेषण”। यह पुस्तक साहित्य के स्वरूप, उसके उद्देश्य, और उसके मूल्यांकन के सिद्धांतों पर एक विवेचनात्मक कृति है। यह भारतीय काव्यशास्त्र या पाश्चात्य साहित्य-सिद्धांत (Literary Theory) पर आधारित हो सकती है। इसमें ‘साहित्य क्या है?’, ‘कविता और गद्य में क्या अंतर है?’, ‘साहित्य का समाज से क्या संबंध है?’, और ‘एक अच्छी कृति के क्या मापदंड हैं?’ जैसे मौलिक प्रश्नों पर विचार किया गया होगा। इसमें विभिन्न साहित्यिक वादों (जैसे- रस, अलंकार, यथार्थवाद, या उत्तर-आधुनिकतावाद) का परिचय और विश्लेषण भी हो सकता है। यह साहित्य के गंभीर छात्रों और आलोचकों के लिए एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।

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