इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह मार्कण्डेय महापुराण का दूसरा भाग है, जो 18 प्रमुख पुराणों में से एक है। यह पुराण ऋषि मार्कण्डेय और जैमिनी के बीच संवाद के रूप में है। अन्य पुराणों के विपरीत, यह किसी विशेष देवता पर केंद्रित नहीं है, बल्कि इसमें धर्म, कर्म, और सृष्टि से संबंधित विविध विषयों पर चर्चा है। इसका सबसे प्रसिद्ध अंश ‘देवी माहात्म्यम्’ या ‘दुर्गा सप्तशती’ है, जिसमें देवी महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती द्वारा राक्षसों के संहार का वर्णन है। यह दूसरा भाग संभवतः पुराण की कथाओं और दार्शनिक चर्चाओं को आगे बढ़ाता है।
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