इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक जैन ‘पुराण’ है जो सोलहवें तीर्थंकर, भगवान ‘शांतिनाथ’ के जीवन और उनके पूर्व भवों की कथाओं का विस्तृत वर्णन करता है। पुराण शैली में रचित इस ग्रंथ में उनके जन्म, राज्य, वैराग्य, तपस्या, कैवल्य ज्ञान और मोक्ष की घटनाओं का भक्तिमय चित्रण है। यह ग्रंथ न केवल भगवान शांतिनाथ की महिमा का गुणगान करता है, बल्कि जैन धर्म के कर्म सिद्धांत और आध्यात्मिक विकास के मार्ग को भी इन कथाओं के माध्यम से समझाता है।
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