इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह बौद्ध धर्म के ‘सुत्त पिटक’ के पाँच प्रमुख निकायों में से चौथे, ‘अंगुत्तर निकाय’ का मूल ‘पालि’ भाषा का संस्करण है। इस निकाय की विशेषता यह है कि इसमें बुद्ध के उपदेशों को संख्यात्मक क्रम में व्यवस्थित किया गया है – ‘एक’ वस्तु वाले सुत्त से लेकर ‘ग्यारह’ वस्तुओं वाले सुत्तों तक। यह बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को एक व्यवस्थित और यादगार तरीके से प्रस्तुत करता है। यह बौद्ध विद्वानों और शोधकर्ताओं के लिए एक मौलिक ग्रंथ है।
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