इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित ‘रामायण’ का पाँचवाँ और सबसे महत्वपूर्ण कांड है। ‘सुंदरकांड’ पूरी तरह से भगवान श्री राम के भक्त हनुमान जी के पराक्रम, बुद्धि और भक्ति पर केंद्रित है। इसमें उनके द्वारा समुद्र लांघना, लंका में सीता की खोज, लंका दहन और राम को सीता का समाचार देने तक की घटनाओं का ओजपूर्ण वर्णन है। इसे अकेले ही पाठ करने का बहुत महत्व है और माना जाता है कि इसका पाठ सभी बाधाओं को दूर करता है।
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