इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह जैन धर्म का एक monumental और विश्वकोशीय ग्रंथ है, जिसे 19वीं सदी के महान विद्वान आचार्य विजयराजेन्द्र सूरीश्वरजी ने लगभग 27 वर्षों के अथक परिश्रम से संकलित किया। ‘अभिधानराजेन्द्र’ प्राकृत और संस्कृत भाषा में जैन साहित्य में प्रयुक्त सभी शब्दों का एक विस्तृत कोष है, जिसमें प्रत्येक शब्द की व्युत्पत्ति, अर्थ, और संदर्भ दिए गए हैं। यह जैन विद्या का सबसे बड़ा और सबसे प्रामाणिक विश्वकोश माना जाता है।
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