इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह अठारह महापुराणों में से एक, ‘नारद पुराण’ का पहला खंड है। यह पुराण देवर्षि नारद द्वारा सुनाया गया है और इसे वैष्णव पुराण माना जाता है। इसके पूर्वार्ध (पहले भाग) में सृष्टि, प्रलय, और विभिन्न तीर्थों के माहात्म्य का वर्णन है। नारद पुराण की एक अनूठी विशेषता यह है कि इसमें अन्य सभी अठारह पुराणों की एक संक्षिप्त विषय-सूची और उनका माहात्म्य भी दिया गया है, जिससे यह ‘पुराणों का विश्वकोश’ जैसा बन जाता है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।