इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह जैन धर्म के monumental विश्वकोश ‘श्री अभिधान राजेन्द्र’ का पहला भाग है। 19वीं सदी के महान विद्वान आचार्य विजयराजेन्द्र सूरी द्वारा रचित यह कोष प्राकृत और संस्कृत में लिखे गए संपूर्ण जैन साहित्य में प्रयुक्त शब्दों का एक विस्तृत शब्दकोश है। यह प्रत्येक शब्द की व्युत्पत्ति, उसके विभिन्न अर्थ और आगमों में उसके संदर्भ को प्रस्तुत करता है। यह जैन विद्या के अध्ययन के लिए एक अद्वितीय और अनिवार्य संदर्भ ग्रंथ है।
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