इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
गोरा’ रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित एक कालजयी उपन्यास है, जो बीसवीं सदी के आरंभिक भारत के सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक मंथन का एक महाकाव्यात्मक चित्रण प्रस्तुत करता है। उपन्यास का नायक, गोरा, एक कट्टर हिंदू राष्ट्रवादी है, लेकिन बाद में उसे अपनी आयरिश जड़ों का पता चलता है। इस रहस्योद्घाटन के माध्यम से, टैगोर पहचान, राष्ट्रवाद, धर्म, जाति और परंपरा जैसे जटिल मुद्दों की गहन पड़ताल करते हैं। यह उपन्यास संकीर्ण राष्ट्रवाद पर मानवतावाद की विजय और सच्चे भारत की खोज का एक शक्तिशाली आख्यान है, जो आज भी प्रासंगिक बना हुआ है।
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