इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
घट रामायण’ संत तुलसी साहब (हाथरस वाले) द्वारा रचित एक महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक ग्रंथ है, जो संत मत परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। यह कृति रामायण की कथा को एक आंतरिक और आध्यात्मिक रूपक के रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें ‘घट’ का अर्थ है ‘शरीर’, और राम, रावण, सीता, हनुमान जैसे पात्रों को आंतरिक शक्तियों और वृत्तियों का प्रतीक माना गया है। यह ग्रंथ बाहरी कथा के बजाय शरीर के भीतर चल रहे अच्छाई और बुराई के संघर्ष और सुरत-शब्द-योग के माध्यम से आत्म-ज्ञान प्राप्त करने की प्रक्रिया का वर्णन करता है। यह इसका प्रथम भाग है।
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