इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“घाघ और भड्डरी” मध्यकालीन भारत के दो प्रसिद्ध लोक-कवियों की कहावतों और सूक्तियों का एक संग्रह है। ये दोनों कवि अपनी कृषि, मौसम, और ग्रामीण जीवन से संबंधित व्यावहारिक ज्ञान से भरी रचनाओं के लिए जाने जाते हैं। उनकी कहावतें सरल, सीधी और लयबद्ध होती थीं, जिससे वे आसानी से आम लोगों की जुबान पर चढ़ जाती थीं। इस पुस्तक में मौसम की भविष्यवाणी, फसल बोने का सही समय, स्वास्थ्य, और सामाजिक व्यवहार से संबंधित उनकी सैकड़ों ज्ञानवर्धक कहावतें संकलित हैं। यह कृति न केवल भारतीय लोक-साहित्य की एक अमूल्य निधि है, बल्कि यह उस समय के समाज और उनके पारंपरिक ज्ञान की एक अनूठी झलक भी प्रस्तुत करती है।
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