इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक संभवतः स्वामी दयानन्द सरस्वती के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ के प्रारंभिक या ‘आदिम’ संस्करण पर एक विश्लेषण या टिप्पणी है। ‘सत्यार्थ प्रकाश’ आर्य समाज का एक आधारभूत ग्रंथ है। लेखक का तर्क है कि ‘सत्यार्थ प्रकाश’ का पहला संस्करण भी अपने आप में एक ‘अपूर्व’ यानी अद्वितीय ग्रंथ है, और हो सकता है कि बाद के संस्करणों में हुए परिवर्तनों से उसका मूल स्वरूप कुछ भिन्न हो। यह कृति ‘सत्यार्थ प्रकाश’ के पाठ-विश्लेषण और उसके विकास के अध्ययन में रुचि रखने वाले शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
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