इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
अथ सप्तशती प्रारम्भयते’ प्रसिद्ध ग्रंथ ‘दुर्गा सप्तशती’ (जिसे ‘देवी माहात्म्य’ या ‘चंडी पाठ’ भी कहते हैं) के पाठ की शुरुआत का सूचक है। यह मार्कण्डेय पुराण का एक अंश है और इसमें 700 श्लोक हैं, जो देवी महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की महिमा का गुणगान करते हैं। यह ग्रंथ देवी द्वारा महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ और अन्य राक्षसों के संहार की कथा बताता है। यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसका पाठ, विशेष रूप से नवरात्रि में, आध्यात्मिक शक्ति, सुरक्षा और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है। ‘अथ प्रारम्भयते’ का अर्थ है ‘अब यहाँ से प्रारंभ होता है’।
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